Posts

Showing posts from June, 2018

MS Dhoni Retirement: धोनी ने लिया संन्यास, सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

MS Dhoni Retirement: धोनी ने लिया संन्यास, सोशल मीडिया पर किया पोस्ट : div class='at-above-post addthis_tool' data-url='https://www.dehuti.com/ms-dhoni-retirement/'/divदो बार के विश्व कप विजेता भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (International cricket) को अलविदा (Retirement) कहकर पिछले एक साल से उनके भविष्य को लेकर लग रही अटकलों पर विराम लगा दिया। गैर पारंपरिक शैली में कप्तानी और मैच को अंजाम ...

अपनों की उपेक्षा, अनादर और संघर्ष की मार्मिक कहानी

Image
बहुत कुछ होने के बावजूद कुछ भी नहीं, फुटपाथ पर जीने के लिए है विवश उषा लाल ,जो पेशे से बिहार में गवर्नमेंट स्कूल में  शिक्षका हैं उनके द्वारा अपने फेसबुक वाल पर शेयर की गयी जीवटता कि ये दासता आपको अंदर तक झकझोर के रख देगी, आप भी उनकी मदद के लिए हर संभव प्रयास की दिशा में जरूर सोचेंगे, आपसे अनुरोध है ज्यादा कुछ ना कर सके तो कोई बात नहीं इस पोस्ट को अपने सोशल मिडिया वाल (फेसबुक, व्हाट्सअप) पर शेयर जरूर करियेगा, हो सकता है आपका एक शेयर ही उन तक मदद के लिए कोई हाथ पहुंचा दे, तो चलिए पढ़िए उषा लाल जी के शब्दों में ही ये हकीकत की झकझोर वाली दास्ता  पटना काली घाट (दरभंगा हॉउस) बिहार की एक विरासत जो कभी महाराजा कामेश्वर सिंह का राज- महल था आज यहाँ पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई होती है। एकदम गंगा किनारे। इसी परिसर में काली जी का मंदिर जो अति प्राचीन है आज भी आस्था का केंद्र है। पटना वासी इस स्थान से भली भाँति परिचित है। मैं भी अक्सर जाती हूँ निरुद्देश्य। बस वहाँ गंगा तट पर बैठना और लहरों के साथ स्वयं में डूबते जाना अच्छा लगता है। आज भी सुबह वहाँ जाना हुआ। पर आज एक ...

...तो इसीलिए आज भी अधूरी है पुरी के जगन्‍नाथ की मूर्ति

Image
सभी मंदिरों और पवित्र स्थानों से जुड़ी कई कहानियां होती हैं. यही प्रचलित गाथाएं आगे चलकर भक्तों को उन स्थानों तक लाने के लिए प्रभावित करती हैं. ऐसा ही एक स्थान है पुरी का जगन्नाथ मंदिर. इस प्रसिद्ध मंदिर से जुड़ी भी एक कथा बहुत प्रचलित है. क्या है वो पूरी कहानी पढ़ें नीचे.  एक बहुत प्रचलित कथा के अनुसार माता यशोदा, देवकी जी और उनकी बहन सुभद्रा वृन्दावन से द्वारका आईं. उनके साथ मौजूद रानियों ने उनसे निवेदन किया कि वे उन्हें श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के बारे में बताएं. इस बात पर माता यशोदा और देवकी उन रानियों को लीलाएं सुनाने के लिए राज़ी हो गई. उनकी बातों को कान्हा और बलराम सुन ना लें इसीलिए माता देवकी की बहन सुभद्रा बाहर दरवाजे पर पहरा देने लगीं. माता यशोदा ने कृष्ण की लीलाओं की गाथा आरंभ की और जैसे-जैसे वो बोलती चली गईं सब उनकी बातों में मग्न होते गए. खुद सुभद्रा भी पहरा देने का ख्याल भूलकर उनकी बातों सुनने लगीं. इस बीच कृष्ण और बलराम दोनों वहां आ गए और इस बात की किसी को भनक नहीं हुई, सुभद्रा भी इतनी मग्न थीं कि उन्हें पता ना चला कि कान्हा और बलराम कब वहां आ गए.  ...

Popular posts from this blog

अच्छी उपज के लिए बोरान

जानें किस महीने में कौन सी सब्जी लगाने से होता है अधिक फायदा

फूलों की खेती में संभावनाएँ

टपक सिंचाई (ड्रिप सिंचाई) प्रणाली क्या है?