MS Dhoni Retirement: धोनी ने लिया संन्यास, सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

MS Dhoni Retirement: धोनी ने लिया संन्यास, सोशल मीडिया पर किया पोस्ट : div class='at-above-post addthis_tool' data-url='https://www.dehuti.com/ms-dhoni-retirement/'/divदो बार के विश्व कप विजेता भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (International cricket) को अलविदा (Retirement) कहकर पिछले एक साल से उनके भविष्य को लेकर लग रही अटकलों पर विराम लगा दिया। गैर पारंपरिक शैली में कप्तानी और मैच को अंजाम ...

Green fertilizers (हरी खाद) : एक वरदान

हरी खाद बनाने की विधी

  • अप्रैल मई माह में गेंहु की कटाई के बाद जमीन की सिंचाई कर लें | खेत में खड़े पानी में 50 की.ग्राम. प्रति है. की दर से ढेंचा का बीज छितरा लें |
  • जरुरत पड़ने पर 10 से 15 दिन में ढेंचा फसल की हल्की सिंचाई कर लें |
  • 20 दिन की अवस्था पर नत्रजन खाद छितराने से नोड्यूल बनने में सहायता मिलती है |
  • 55 से 60 दिन की अवस्था में हल चला कर हरी खाद को पुन: खेत में मिला दिया जाता है | इस तरह लगभग 10.15 टन प्रति हे. की दर से हरी खाद उपलब्ध हो जाती है |
  • जिससे 60 से 80 किलो ग्राम नाईट्रोजन प्रति हे. प्राप्त होता है | मिटटी में ढेंचे के पौधों के गलने – सड़ने से बैक्टीरिया द्वारा नियत सभी नाईट्रोजन जैविक रूप में लम्बे समय के लिए कार्बन के साथ मिटटी को वापिस मिल जाते है |

हरी खाद बनाने के लिए अनुकूल फसले –

  • ढेंचा, लोबिया, उड़द, मूंग, ग्वार बरसीम, कुच्छ मुख्य फसलें है | ढेंचा इनमें से अधिक लिया जाता है |
  • ढैचा की मुख्य किस्में सस्बेनीया एजिप्टिका, एस रोस्टेटा तथा एक्वेलेटा अपने त्वरित खनिज करण पैटर्न, उच्च नाईट्रोजन मात्र तथा अल्प C:N अनुपात के कारण बाद में बोई गई मुख्य फसल की उत्पादकता पर उल्लेखनीय प्रभाव डालने में सक्षम है |

आदर्श हरी खाद की निम्नलिखित गुण होनी चाहिए –

  • उगाने का न्यूनतम खर्च
  • न्यूनतम सिंचाई आवश्यकता
  • विपरीत परिस्थिति में भी उगने की क्षमता हो
  • खरपतवार विरोधी हो
  • जो उपलब्ध वातावरण का प्रयोग करते हुए अधिकतम उपज दे |

हरी खाद को मिटटी में मिलाने की अवस्था

  • हरी खाद के लिए बोई गयी फसल 55 से 60 दिन बाद जोत कर मिटटी में मिलाने के लिए तैयार हो जाती है |
  • इस अवस्था पर पौधों की लम्बाई व हरी शुष्क सामग्री अधिकतम होती है 55 से 60 दिन की फसल अवस्था पर तना नर्म व नाजुक होता है जो आसानी से मिटटी में कट कर मिल जाता है |
  • इस अवस्था में कार्बन नाईट्रोजन अनुपात कम होता है | पौधे रसीले और जैविक पदार्थ से भरे होते है इस अवस्था पर नाईट्रोजन की मात्र की उपलब्धता बहुत अधिक होती है |
  • जैसे – जैसे हरी खाद के लिए लगाई गयी फसल की अवस्था बढती है कार्बन – नाईट्रोजन अनुपात बढ़ जाता है | जीवाणु हरी खाद के पौधों को गलाने सडाने के लिए मिटटी की नाईट्रोजन इस्तेमाल करते है | जिससे मिटटी में अस्थाई रूप से नाईट्रोजन की कमी हो जाती है |

हरी खाद के लाभ               

  • हरी खाद को मिटटी में मिलाने से मिटटी की भौतिक शरीरिक स्थिति में सुधार होता है |
  • हरी खाद से मृदा उर्वरता की भरपाई होती है
  • पोषक तत्वों की उपलब्धता को बढाता है
  • सूक्ष्म जीवाणुओं की गतिविधियों को बढाता है
  • मिटटी की संरचना में सुधार होने के कारण फसल की जड़ों का फैलाव अच्छा होता है |हरी खाद के लिए उपयोग किये गये फलीदार पौधे वातावरण से नाईट्रोजन व्यवस्थित करके नोड्यूल्ज में जमा करते है जिससे भूमि ककी नाईट्रोजन शक्ति बढती है |

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